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Utpatti Prakarana (Creation) · Sarga 52

इक्यावनवाँ सर्ग समाप्त बावनवाँ सर्ग राजा विदूरथ की मृत्यु, संसार की असत्यता ओर उस देश की लीला की वासनारूपता का वर्णन ।

29 verse-groups

  1. Verses 1–5श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स श्रीरामचन्द्रजी, इस बीचमें, अपने सामने मृत्युशय्या पर लेटे हुए…
  2. Verses 6–9रूप भी है ही नहीं । ऐसी अवस्था में निर्विषय चैतन्य ही अवशिष्ट रहता है, वही मुख्य ज्ञातव्य…
  3. Verse 10स्वयंप्रकाश, शान्त, निर्विकार वही (चैतन्य ही) मण्डपघर के अन्दर अपने चिन्मात्र स्वभाव से उ…
  4. Verse 11मण्डप के अन्तर्गत आकाश में भी जब जगत्‌ नहीं है, तब शुद्ध चिदाकाश मे जगत्‌ नहीं है, इसमें…
  5. Verse 12अति क्षुद्र वस्तु के अन्दर विशाल वस्तु का समावेश नहीं हो सकता, अतएव अल्पवस्तु में बृहत्पद…
  6. Verse 13भ्रम को देखनेवाला दूसरा नहीं है, तो भ्रम ही भ्रम को देखे ? इस पर कहते हैं। भ्रम असत्‌ दृश…
  7. Verse 14आप उस परम पद को, जो नाश और उत्पत्तिरहित, स्वयंप्रकाश, शान्त, आदि ओर निर्विकार हे, जगत्‌-र…
  8. Verse 15अति अल्प स्थान में बृहत्तर वस्तु का समावेश न हो सकना भी दृश्यका ही दूषण हे । स्वाधिष्ठान…
  9. Verse 16वहाँ पर तत्त्वज्ञ पुरुषों को न तो जगत्‌ की प्रतीति होती हे ओर न किसी सृष्टि का ही अनुभव ह…
  10. Verse 17अनुमान प्रमाण से भी उक्त बात को सिद्ध करते हैं। मेरू आदि पर्वतों के समुदाय से युक्त वह सम…
  11. Verse 18स्वप्न में सबके अनुभव से सिद्ध व्याप्ति को दिखलातेहै। स्वप्नः कण्ठे समाविशेत्‌” इस श्रुति…
  12. Verse 19जैसे बहुत से केले के कोमल पत्ते तह के साथ अल्प स्थान में संनिविष्ट रहते हैं, वैसे ही अत्य…
  13. Verse 20जैसे देह के अन्दर स्वप्नमहानगर दिखलाई देता है, वैसे ही चिदणु में तीनों जगत्‌ हैं, उसके अन…
  14. Verse 21हे भद्रे, उनमें से जिस जगत्‌ में यह पद्म राजा शवरूप में स्थित है, वहाँ तुम्हारी सौत यह ली…
  15. Verse 22यह लीला ज्यों ही तुम्हारे सामने मूर्छा को प्राप्त हुई, त्यों ही तुम्हारे पति राजा पद्म के…
  16. Verses 23–24लीला ने कहा : हे देवि, यह लीला वहाँ पर पहले देहधारिणी कैसे हो गई, जिस स्थिति में यह मेरी…
  17. Verses 25–26श्री देवीजी ने कहा : भद्रे, सुनो, जैसे तुमने मुझसे पूछा है, वह सब में संक्षेप से तुमसे कह…
  18. Verses 27–30यह जो युद्ध तुमने देखा है, यह स्वप्नयुद्ध के समान भ्रान्तियुद्ध ही था, यह लीला भी, जिसके…
  19. Verses 31–36इस प्रकार यह (लीला), तुम, यह संसार स्थिति ओर यह राजा ये सब भ्रान्तिरूप ही हुए हैं, आत्मा…
  20. Verse 37तुम्हारे पति के मरने के अनन्तर ही तुरन्त तुम्हारे संकल्परूप तुम्हारे पति ने इसे अपने सामन…
  21. Verse 38यदि यह वासनामयी थी, तो मेरे पतिने इसको सत्यरूप से कैसे अनुभव किया, इस पर कहती हैं। जब चित…
  22. Verse 39जब चित्त आधिभौतिक (व्यावहारिक) पदार्थो को विवेकज्ञानाभ्यास से परमार्थसत्य नहीं जानता, तब…
  23. Verse 40मरणज्ञान से पुनर्जन्मरूप भ्रम होने पर तुमको इस राजा ने पत्नीरूप से जाना और वासनामय अन्य ल…
  24. Verse 41इस प्रकार इस राजा ने तुमको अपनी वासनारूप ही देखा और तुमने राजा को अपनी वासनामय ही देखा ।…
  25. Verses 42–43चूँकि ब्रह्म सर्वव्यापक है, अतएव जब जहाँ पर जैसी वासना होती है, तब वहाँ पर वह तुरन्त वैसा…
  26. Verses 44–48जब इन दो दम्पतियों का मरणानुकूल मूर्च्छा का क्षण आया, तभी इन्होंने सबका, जो आगे कहा जायेग…
  27. Verse 49इस वासनात्मक लीला ने और मैंने क्यों आपकी आराधना की और क्यों आप हमपर प्रसन्न हुई ? इस पर क…
  28. Verses 50–51पहले यह कैसे प्राप्त हुई इसका उत्तर देकर अब यह देहधारिणी कैसे हुई ? इस अंश का उत्तर देती…
  29. Verse 52चन्द्रमण्डल के सदश मुखकान्तिवाली ओर मृग के तुल्य विशाल नेत्रवाली यह लीला, जिसकी सूर्य की…