Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 52, Verse 22
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 52, verse 22 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
यदैव मूर्च्छामायाता लीलेयं पुरतस्तव ।
तदैव भर्तुः पद्मस्य शवस्य निकटे स्थिता ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
यह लीला
ज्यों ही तुम्हारे सामने मूर्छा को प्राप्त हुई, त्यों ही तुम्हारे पति राजा पद्म के शव के निकट जा
पहुँची है