Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 52, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 52, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
त्रिजगच्चिदणावन्तरस्ति स्वप्नपुरं यथा ।
तस्याप्यन्तश्चिदणवस्तेष्वप्येकैकशो जगत् ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे देह
के अन्दर स्वप्नमहानगर दिखलाई देता है, वैसे ही चिदणु में तीनों जगत् हैं, उसके अन्दर भी
चिदणु है, उनमें भी प्रत्येक में जगत् हे