Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 52, Verse 37
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 52, verse 37 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 37
संस्कृत श्लोक
त्वद्भर्तुर्मरणे क्षिप्रं समनन्तरमेव हि ।
त्वद्भर्त्रैषा पुरो दृष्टा त्वत्संकल्पात्मनामुना ॥ ३७ ॥
हिन्दी अर्थ
तुम्हारे पति के मरने के अनन्तर ही तुरन्त तुम्हारे संकल्परूप
तुम्हारे पति ने इसे अपने सामने देखा