Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 52, Verse 40
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 52, verse 40 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
अथो मरणसंवित्त्या पुनर्जन्ममये भ्रमे ।
त्वं हि संविदितानेन त्वया च गत एव सः ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
मरणज्ञान से पुनर्जन्मरूप भ्रम होने पर तुमको इस राजा ने पत्नीरूप से जाना
और वासनामय अन्य लीलारूपता को प्राप्त हुई तुमसे संगत हुआ