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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 52, Verse 38

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 52, verse 38 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 38

संस्कृत श्लोक

यदाधिभौतिकं भावं चेतोऽनुभवति स्वयम् । चेत्यं सन्मयमेवात आतिवाहिककल्पनम् ॥ ३८ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि यह वासनामयी थी, तो मेरे पतिने इसको सत्यरूप से कैसे अनुभव किया, इस पर कहती हैं। जब चित्त अभ्यासवश दृढवासना से आधिभौतिक (व्यावहारिक) पदार्थ का अनुभव करता है, तब अनुभव से वह परमार्थ सत्य हो जाता है, परन्तु वस्तुतः दृश्य ही प्रातिभासिक है