Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 52, Verse 39
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 52, verse 39 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
यदाधिभौतिकं भावं चेतो वेत्ति न सन्मयम् ।
आतिवाहिकसंकल्पस्तदा सत्योपजायते ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
जब चित्त आधिभौतिक (व्यावहारिक) पदार्थो को विवेकज्ञानाभ्यास से परमार्थसत्य
नहीं जानता, तब उसकी वासना से सत्य (दढ) प्रपंच में प्रातिभासिकता का निश्चय होता
है