Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 52, Verse 49
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 52, verse 49 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 49
संस्कृत श्लोक
भवतां चेतनांशानामहं चेतनधर्मिणी ।
कुलदेवी सदा पूज्या स्वत एव करोम्यहम् ॥ ४९ ॥
हिन्दी अर्थ
इस वासनात्मक लीला ने और मैंने क्यों आपकी आराधना की और क्यों आप हमपर
प्रसन्न हुई ? इस पर कहती है ।
मैं, व्यष्टिचितन जो आप लोग हैं, आपकी समष्ट्चितना (हिरण्यगर्भचेतना) हूँ और आप
लोगों की कुलदेवी होने से सदा पूजनीय हूँ, अतएव स्वतः ही सब कुछ करती हूँ