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Vairagya Prakarana (Dispassion) · Sarga 2

पहला सर्ग समाप्त दूसरा सर्ग अधिकारी, षट्काण्डात्मक पूर्वरामायण के साथ इस ग्रन्थ का सम्बन्ध ब्रह्मा के आदेश से इस ग्रन्थ का निर्माण तथा मुक्तो की चर्या का वर्णन |

21 verse-groups

  1. Verse 1-मंगलादीनि मंगलमध्यानि इत्यादि पातंजल महाभाष्य में दर्शित श्रुति के अनुसार रचे जानेवाले म…
  2. Verse 2वाल्मीकिजी ने कहा : मैं इस संसाररूप कारागार में बद्ध (२) इस श्लोक के और भी अनेक अर्थ टीका…
  3. Verse 3भाव यह है कि न अत्यन्त ज्ञानी और न अत्यन्त अज्ञानी इस शास्त्र का अधिकारी है, यह कहना ठीक…
  4. Verses 4–5तात्पर्य यह है कि पूर्वरामायण में जिस मयादापुरुषोत्तम भगवान श्रीरामचन्द्रजी की कथा का वर्…
  5. Verse 6मेघावी भरद्वाज ने मुझसे पूर्वरामायण को प्राप्त कर सुमेरु पर्वतस्थ किसी वन में उसे ब्रह्मा…
  6. Verse 7उसे सुनकर सबके पितामह भगवान्‌ ब्रह्मा भरद्वाज के ऊपर बड़े प्रसन्न हुए और वरदान के बहाने ज…
  7. Verse 8भरद्वाज ने कहा : हे भगवन्‌ हे भूत, भविष्यत्‌ और वर्तमान के स्वामी, जिससे यह जनता दुःख से…
  8. Verses 9–10श्री ब्रह्माजी ने कहा : वत्स भरद्वाज, जो तुमने मुझसे पूछा है इस विषय में अपने गुरु श्रीवा…
  9. Verses 11–12वाल्मीकिजी ने कहा : भगवन्‌ ब्रह्मा भरद्वाज से यह कहकर उसके साथ मेरे आश्रम में आये। मैंने…
  10. Verse 13हे मुनिश्रेष्ठ, पवित्र निर्दोष रामचरितवर्णनरूप रामायण का आरम्भ करके (यद्यपि आपको विस्तृत…
  11. Verse 14हे महर्षे जैसे शीघ्रगामी जहाज द्वारा दुर्लघ्य महासागर अनायास उत्तीर्ण हो जाता है वैसे ही…
  12. Verse 15इसीलिए हमारा अनुरोध है, आप लोगों के हित के लिए इस रामायण महाशास्त्र को शीघ्र प्रकाशित कीज…
  13. Verse 16जैसे क्षणभर के लिए जलराशि से उठी ऊँची लहर उसी क्षण में जल में लीन हो जाती है वैसे ही भगवा…
  14. Verse 17ब्रह्माजी के आने पर मुझे अत्यन्त विस्मय हो गया था, इसलिए उस समय मैं उनके वाक्य का मर्म नह…
  15. Verses 18–19वत्स भरद्वाज, ब्रह्माजी ने यह क्या कहा ? उसे मुझसे शीघ्र कहो । मेरे यों पूछने पर भरद्वाज…
  16. Verses 20–21(पूर्वरामायण वित्तशुद्धिजनक होने के कारण लोकहितकारी है, उत्तररामायण मुक्तिप्रद होने के का…
  17. Verse 22भगवन्‌, किस प्रकार उन्होने दुःखमार्ग का अतिक्रमण किया था, मुझे उसका विशदरूप से उपदेश दीजि…
  18. Verses 23–24कहा : वत्स भरद्वाज, जो तुमने मुझसे पूछा है, उसे मैं विस्तार से तुमसे कहता हूँ, सावधान होक…
  19. Verse 25महामते भरद्वाज, कमलनयन राम सम्पूर्ण विषयों को मिथ्या समझ कर उनमें आसक्ति का त्यागकर जैसे…
  20. Verses 26–30महामना लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, कौशल्या, सुमित्रा, सीता, दशरथ एवं राम के मित्र कृतास्त्र ओ…
  21. Verse 31अधिक क्या कहूँ, उत्कृष्ट ज्ञानबल से युक्त व्यक्ति अपार संसारसागर में गिरने पर भी इस परम य…