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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 2, Verse 7

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 2, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 2 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

अथास्य तुष्टो भगवान्ब्रह्मा लोकपितामहः । वरं पुत्र गृहाणेति तमुवाच महाशयः ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

उसे सुनकर सबके पितामह भगवान्‌ ब्रह्मा भरद्वाज के ऊपर बड़े प्रसन्न हुए और वरदान के बहाने जगत्‌ के उद्धार के साधन मोक्षशास्त्र की रचना करनी चाहिये, यों उत्तम आशयवाले ब्रह्मा ने भरद्वाज से कहा : हे पुत्र, वर माँगो