Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 2, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 2, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 2 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
भरद्वाज उवाच ।
भगवन्भूतभव्येश वरोऽयं मेऽद्य रोचते ।
येनेयं जनता दुःखान्मुच्यते तदुदाहर ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
भरद्वाज ने कहा : हे भगवन् हे भूत,
भविष्यत् और वर्तमान के स्वामी, जिससे यह जनता दुःख से मुक्त हो जाय, वह उपाय मुझसे कहिये।
इसी वर में मेरी अभिरुचि है