Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 2, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 2, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 2 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
रामस्वभावकथनादस्माद्वरमुने त्वया ।
नोद्वेगात्स परित्याज्य आसमाप्तेरनिन्दितात् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मुनिश्रेष्ठ, पवित्र निर्दोष
रामचरितवर्णनरूप रामायण का आरम्भ करके (यद्यपि आपको विस्तृत ग्रन्थ की रचना में बड़ा क्लेश
होगा तथापि) जब तक उसकी समाप्ति न हो तव तक उसे न छोड दीजिए, उसे अवश्य ही पूरा कर
डालिए