Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 2, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 2, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 2 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
मम पुण्याश्रमात्तस्मात्क्षणादन्तर्द्धिमागतः ।
मुहूर्ताभ्युत्थितः प्रोच्चैस्तरङ्ग इव वारिणः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे क्षणभर के लिए जलराशि से उठी
ऊँची लहर उसी क्षण में जल में लीन हो जाती है वैसे ही भगवान् ब्रह्मा यह कह कर उसी क्षण में मेरे उस
पवित्र आश्रम से अन्तर्हित हो गये