Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 2, Verses 23–24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 2, verses 23–24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 2 · श्लोक 23 ,24
संस्कृत श्लोक
भरद्वाजेन राजेन्द्र वदेत्युक्तोऽस्मि सादरम् ।
तदा कर्तुं विभोराज्ञामहं वक्तुं प्रवृत्तवान् ॥ २३ ॥
शृणु वत्स भरद्वाज यथापृष्टं वदामि ते ।
श्रुतेन येन संमोहमलं दूरे करिष्यसि ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
कहा : वत्स भरद्वाज, जो तुमने मुझसे पूछा है, उसे मैं विस्तार से तुमसे कहता हूँ, सावधान होकर
सुनो । उसे सुनने से तुम्हारा आत्मतत्त्व का अज्ञानरूप मल दूर हो जायेगा और मन की वृत्ति निर्मल
हो जायेगी