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Vairagya Prakarana (Dispassion) · Sarga 1

30 verse-groups

  1. Verse 1॥ श्री गणेशाय नमः ॥ आदिकवि श्रीमद्वाल्मीकिमहाभुनिप्रणीत श्री योगवासिष्ठ महारामायण परमहंस…
  2. Verse 2सत्यस्वरूप के चिदेकत्वरस अनुभव द्वारा उपपादन करते हुए त्वम्पदार्थ जीव के तत्त्वभूत उसी स्…
  3. Verse 3(7) (अनेन जीवेनात्मनानुप्रविश्य नामरूपे व्याकरवाणि इस जीवरूप आत्मा से प्रवेशकर जगत्‌ की र…
  4. Verse 4यों मंगलाचरण के साथ-साथ विषय आदि का प्रदर्शन करते हुए संक्षेपतः शास्त्रार्थ का प्रदर्शन क…
  5. Verse 5सुतीक्ष्ण ने कहा : भगवन्‌, आप धर्म के तत्त्व को जानते हैं, सम्पूर्ण शास्त्रों का आपने भली…
  6. Verse 6क्या मोक्ष का (०३) उत्पादक कर्म है ? अथवा ज्ञान ही मोक्ष का व्यंजक है ? या कर्म और ज्ञान…
  7. Verse 7"यत्र दुःखेन सम्भिन्‍नम्‌ इत्यादि श्रुति से स्वर्ग मे नित्यत्व आदिका परिज्ञान होता है, वा…
  8. Verse 8पूर्वोक्त अर्थ को दृढ़ करने के लिए फिर कहते हैं। केवल कर्मो से या केवल ज्ञान से मोक्ष नही…
  9. Verses 9–10इस विषय में एक प्राचीन इतिहास कहता हूँ : प्राचीन काल में सम्पूर्ण वेदों का ज्ञाता कारुण्य…
  10. Verses 11–13घर आकर वह सन्ध्यावन्दन आदि कोई कर्म नहीं करता था, बल्कि उनमें अनेक तरह के सन्देह करने लगा…
  11. Verses 14–16अपने पिता के यों पूछने पर कारुण्य ने कहा : श्रुति ओर स्मृतियों ने जीवनपर्यन्त अग्निहोत्र,…
  12. Verse 17अगस्त्य ने कहा : भद्र, पिता से कह कर कारुण्य चुप हो गया, उस के पिता ने चुप-चाप बैठे हुए प…
  13. Verse 18अग्निवेश्य ने कहा : प्रिय पुत्र, मैं तुमसे एक सुन्दर कथा कहता हूँ, उसे सुनो । उसके अर्थ क…
  14. Verses 19–25अप्सराओं में अत्यन्त सुन्दरी सुरुचि नामकी एक अप्सरा शी । वह मयूरं से आवृत्त हिमालय के शिख…
  15. Verse 26अप्सरा ने कहा : भगवन्‌, वहाँ पर कौन घटना हुई, उसे मुझसे किये मैं आपसे विनयपूर्वक पूछती हू…
  16. Verses 27–31देवदूत ने कहा : हे सुन्दरी, सुनो, मैं विस्तार से तुम्हें वहाँ की घटना सुनाता हू । राजा अर…
  17. Verses 32–35देवराज इन्द्र की वैसी आज्ञा पाकर सम्पूर्णं सामग्रियों से युक्त उस विमान को लेकर मेँ उक्त…
  18. Verses 36–39देवदूत ने कहा : राजन्‌, पुण्य की सामग्री के अनुसार मनुष्य स्वर्ग में उत्तम फल भोगता हे ।…
  19. Verses 40–42स्वर्ग के ये ही गुण ओर दोषों को सुनकर महाराज बोले : देवदूत, मेँ ऐसे स्वर्ग-भोग की इच्छा न…
  20. Verses 43–49देवदूत ने कहा : सुन्दरी, राजा के यों कहने पर मैं वह निवेदन करने के लिए इन्द्र के पास गया…
  21. Verses 50–51राजा ने कहा : भगवन्‌ आप सब धर्मो के तत्त्वों को जानते हैं और जितने ज्ञातव्य विषय हैं उन स…
  22. Verse 52वाल्मीकिजी ने कहा : राजन्‌, सुनिए, मै अखण्डतत्व प्रतिपादक रामायण की कथा कहूँगा, यत्नपूर्व…
  23. Verse 53उक्त रामायण वसिष्ठ-राम संवादस्वरूप हे । (५) वह मुक्ति का अद्वितीय उपाय और अत्यन्त कल्याणक…
  24. Verse 54राजा ने कहा : हे तत्त्वज्ञानियों में श्रेष्ठ, राम कौन हैं ? उनका कैसा स्वरूप है ? वे किस…
  25. Verse 55(५) वसिष्ठ और राम के संवाद से यह सूचित होता है कि वसिष्ठ ने रामचन्द्रजी को उपदेश दिया था।…
  26. Verse 56राजा ने कहा : भगवन्‌, अपराधी व्यक्ति ही शाप का भाजन होता है एवं अपराध भी अपूर्णकाम और अल्…
  27. Verses 57–59वाल्मीकिजी ने कहा : राजन्‌ ! कामक्रोध रहित ओर परम ज्ञानी ब्रह्मा के मानसपुत्र सनत्कुमार ए…
  28. Verses 60–62यह सुनकर सनत्कुमार ने भी अत्यन्त दुःखी होकर विष्णु को यह शाप दिया कि आपको भी सर्वज्ञता का…
  29. Verses 63–64वृन्दा को विमोहित कर उसका पतिव्रत्य भंग किया, इसलिए वृन्दा ने भी उन्हें शाप दिया कि हे वि…
  30. Verses 65–66भक्तवत्सल भगवान ने इस प्रकार भृगु, सनत्कुमार, वृन्दा एवं देवदत्त द्वारा अभिशप्त होकर मनुष…