Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 1, Verse 5
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 1, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 1 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
सुतीक्ष्ण उवाच ।
भगवन्धर्मतत्त्वज्ञ सर्वशास्त्रविनिश्चित ।
संशयोऽस्ति महानेकस्त्वमेतं कृपया वद ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
सुतीक्ष्ण ने कहा : भगवन्, आप धर्म के तत्त्व को जानते हैं, सम्पूर्ण शास्त्रों का आपने भली भाँति
मंथन किया है, मुझे एक बड़ा भारी संशय है, कृपा कर आप इसे दूर कीजिए