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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 1, Verse 56

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 1, verse 56 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 1 · श्लोक 56

संस्कृत श्लोक

राजोवाच । चिदानन्दस्वरूपे हि रामे चैतन्यविग्रहे । शापस्य कारणं ब्रूहि कः शप्ता चेति मे वद ॥ ५६ ॥

हिन्दी अर्थ

राजा ने कहा : भगवन्‌, अपराधी व्यक्ति ही शाप का भाजन होता है एवं अपराध भी अपूर्णकाम और अल्पज्ञ व्यक्ति ही करते हैं, जो सच्चिदानन्दस्वरूप और चिद्घनमूर्ति परमेश्वर थे, उन्हें अभिशाप कैसे ? अतएव उनके प्रति अभिशाप होने का कारण क्या था ओर उनको किसने अभिशाप दिया ? यह आप मुझे बतलाइए