Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 1, Verse 2
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 1, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 1 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
ज्ञाता ज्ञानं तथा ज्ञेयं द्रष्टादर्शनदृश्यभूः ।
कर्ता हेतुः क्रिया यस्मात्तस्मै ज्ञस्यात्मने नमः ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
सत्यस्वरूप के चिदेकत्वरस अनुभव द्वारा उपपादन करते हुए त्वम्पदार्थ जीव के तत्त्वभूत उसी
स्वरूप को पुनः नमस्कार करते हैं।
जिस चिदेकरस परमात्मा से ज्ञाता, ज्ञान, ज्ञेय, दृष्टा, दर्शन, दृश्य, कर्ता, हेतु और क्रिया - ये
सब व्यावहारिक पदार्थ आविर्भूत होते हैं। उस ज्ञाता आदि के साक्षी ओर परमार्थतः ज्ञानरूप से अवस्थित
प्रत्यगात्मा को नमस्कार है ([..])