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Utpatti Prakarana (Creation) · Sarga 11

ढसर्वौ सर्ग समाप्त ग्यारहवाँ सर्ग सत्रूप अधिष्ठानवश प्रलयकाल मेँ भी जगत्‌ की सत्ता का प्रतिपादन ओर स्वतः तो सृष्टिकाल में भी उसकी सत्ता के अभाव का प्रतिपादन |

22 verse-groups

  1. Verse 1प्रलयकाल में “यह जगत्‌ है“ इस प्रकार विशेषरूप सत्ता से जगत्‌ की निवृत्ति होने पर भी ब्रह्…
  2. Verse 2यदि सम्पूर्ण पदार्थों की उत्पत्ति के समय अपनी अलग सत्ता के साथ जगत्‌ का कहींसे आगमन होता,…
  3. Verse 3भगवन्‌, वन्ध्यापुत्र ओर आकाशवन न तो इस समय हैं ओर न आगे होगे । फिर उनकी केसी दृश्यता ओर क…
  4. Verse 4तात्कालिक सत्ता, भविष्यत्कालिकसत्ता ओर प्रत्यक्षवेद्यता भी उक्त वन्ध्यापुत्र ओर आकाशवन मे…
  5. Verse 5सत्ता न होने पर जगत्‌ के उत्पत्ति आदि भी सिद्ध नहीं होते ऐसा कहते हैं। हे रामजी, न तो यह…
  6. Verse 6जगत्‌ की उत्पत्ति प्रत्यक्ष प्रमाण से सिद्ध है, अतएव प्रथम तो उत्पक्तिमान्‌ जगत्‌ का वन्ध…
  7. Verse 7वन्ध्यापुत्र ओर आकाशवृक्ष का ज्ञान (विकल्परूप) उपमान हो सकता यदि वह उपमेयरूप जगत्‌ के बीच…
  8. Verses 8–13उपमेय कोटि में प्रविष्ट जिन किन्‍्हीं पदार्थो से उसको जो उपमा दी जाती है वह अनन्वयालंकार…
  9. Verse 14कारण का असंभव कैसे है 2 उसे कहते है । जैसे छाया का कारण धूप नहीं हो सकती, वैसे ही पृथिवी…
  10. Verse 15परिणामी कारण न होने से यह परिणामी कार्य नहीं है, अतः परिणामदुष्टि से यह कुछ उदित नहीं है,…
  11. Verse 16यदि शंका हो कि अज्ञान ही जगत्‌ का परिणामी कारण है, फिर कारण के अभाव से यह जगत्‌ कार्य नही…
  12. Verse 17उक्त विषय को ही स्पष्ट करते है । स्वप्न में स्वप्न देखनेवाले पुरुष के अन्तःकरण में जो स्व…
  13. Verses 18–20अतः पहले जो जगत्‌ ब्रह्ममात्र है, ऐसी प्रतिज्ञा की गई थी, वह सिद्ध हुई, ऐसा कहते हैं । यह…
  14. Verses 21–22जगत्‌ की जो प्रतीति हो रही है, यह बड़ी दृढ़ है और स्वप्न की प्रतीति पूर्णङूप से अभिव्यक्त…
  15. Verse 23क्यो असम्भव है ? ऐसा यदि कोई कहे, तो इस पर कहते हैं। जब तक मूलाविद्या के विनाश से दृश्य क…
  16. Verse 24यदि कोई कहे कि दृश्य के आत्यन्तिक क्षयका परिज्ञान भले न हो। उसकी क्या आवश्यकता है ? किन्त…
  17. Verse 25दृश्यप्रदेश के परित्याग से ही दृश्य के असम्भव की उपपत्ति हो अर्थात्‌ जहाँ पर दृश्य नहीं ह…
  18. Verse 26यदि पहले से उत्पन्न न हुए दृश्य का स्वयं अस्तित्व न होता, तो द्रष्टा की दृश्यस्वभाव से मु…
  19. Verse 27हे ज्ञानियों में सर्वश्रेष्ठ, इसलिए मेरी मुक्ति के असंभव की आशंका को युक्तियो द्वारा दूर…
  20. Verses 28–29स्वप्न-प्रतीति से जयृत-प्रतीतिवैषम्य की जो श्रीरामचन्द्रजी ने आशंका की थी, श्रीवस्रिष्ठजी…
  21. Verses 30–32उसीसे आपकी दूसरी शंका निवृत्त हो जायेगी और दूसरी शंका की निवृत्ति होने पर आपको शान्ति मिल…
  22. Verse 33आविभाव माना जाता है वैसे ही आपके अभिमत स्रष्टा आत्मा से भिन्नतया जगत्‌ का आविर्भाव हुआ है…