Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 11, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 11, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
क्वासंभवद्भूतजाड्यं पृथ्व्यादेर्जडवस्तुनः ।
कार्यकारणं भवितुं शक्तं छायायाश्चातपो यथा ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
कारण का असंभव कैसे है 2 उसे कहते है ।
जैसे छाया का कारण धूप नहीं हो सकती, वैसे ही पृथिवी आदि जड़ वस्तु का जडता से
रहित ब्रह्म कारण नहीं हो सकता अर्थात् जडका ही जड परिणाम हो सकता है, कहीं भी
स्वविरूद्ध परिणाम नहीं देखने में आता, यह भाव हे