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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 11, Verse 26

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 11, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

आदावेव हि नोत्पन्नं दृश्यं नास्त्येव चेत्स्वयम् । द्रष्टुर्दृश्यस्वभावत्वात्तत्संभवति मुक्तता ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि पहले से उत्पन्न न हुए दृश्य का स्वयं अस्तित्व न होता, तो द्रष्टा की दृश्यस्वभाव से मुक्ति हो सकती, परन्तु जगत्‌ उत्पन्न नहीं है, यह बात अनुभव में नहीं आती, अतः द्रष्टाकी दृश्यस्वभाव से निर्मुक्ति नहीं हो सकती, यह भाव हे