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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 11, Verse 2

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 11, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । कुत आयाति कीदृग्वा वन्ध्यापुत्रः क्व गच्छति । क्व याति कुत आयाति वद वा व्योमकाननम् ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि सम्पूर्ण पदार्थों की उत्पत्ति के समय अपनी अलग सत्ता के साथ जगत्‌ का कहींसे आगमन होता, तो प्रलयकालमे जगत्‌ का अन्य स्थाने गमन और अन्ये स्थिति होती; किन्तु वन्ध्यायुत्रकी नाई अपनी पथक्‌ सत्ता से उसका आगमन ही नहीं है, इस आशय से श्रीवसिष्ठजी कहते हैं : वत्स श्रीरामचन्द्रजी, आपके प्रश्न का उत्तर मैं पीछे दूँगा पहले आप यह बतलाइये कि वन्ध्यापुत्र करटौ से आता हे, कैसा है, और कहाँ जाता है एवं आकाश में स्थित वन कहाँ से आता है और किसमें समा जाता है ?