Utpatti Prakarana (Creation) · Sarga 37
छतीसर्वों सर्ग समाप्त सैंतीसवाँ सर्ग देशों के नामों के साथ मध्यदेशीय लोगों का तथा उनके जय और पराजय का वर्णन |
33 verse-groups
- Verses 1–7श्रीवसिष्ठजी ने कहा : श्रीरामचन्द्रजी, वेग से काटे गये मनुष्य ओर हाथियों से भीषण रण में,…
- Verse 8जो पहले ये ओर दूसरे रण में भस्म हो गये, ऐसा कहा था, उसी को देशों के नामों का विभाग कर सर्…
- Verse 9वस्त्रवती के लोगों द्वारा काटे गये अतएव भूमि में गिर रहे कोशब्रह्म की सीमा के लोग हाथियों…
- Verse 10बाण की भूमि के लोगों ने दाशपुर के शूरो को, जिनके कन्धे और पेट शस्त्रो से काट डाले गये थे,…
- Verse 11विदीर्ण (फाड़े गये) पेट से निकली हुई अपनी अँतड़ीरूपी रस्सियों में उलझे हुए अतएव मन्दगति ह…
- Verses 12–15प्रचण्ड रणघोष करनेवाले भद्रगिरिनिवासियों ने, जो कि संग्रामरूपी यज्ञ में दीक्षित थे, मरदेश…
- Verse 16कर्णाट देश के दक्ष योद्धाओं द्वारा वायु में फेंके गये भालों से जिनके कन्धे कट गये थे, ऐसे…
- Verse 17मगरो के समूह के सदुश गजराजो ने जिनके शस्त्रास्त्र बडे वेग से छिन्न भिन्न कर दिये थे, ऐसे…
- Verses 18–19पाशदेशवासियों द्वारा छोड़े गये श्रृंखलाजाल से भयभीत दाशार्ण लोग जैसे बेंत की अडियो की जड़…
- Verse 20जैसे वीरों के आयुधों के सदुश कान्तिवाले मेघ अपनी बूँदों से जंगलों को सींचते हैं, वैसे ही…
- Verse 21भुशुण्डीनामक हथियार के मण्डल की कान्ति से कालिमा को प्राप्त सूर्य ही ठहरा एक उत्पात (>) (…
- Verses 22–24वत्स श्रीराम, ताम्रों (एक प्रकारके यवनों ) की संग्राम के लिए तत्पर सेनारूपी कान्तकांचनप्र…
- Verse 25पर्वतो से नदी की नाई उतरते हुए शकों के समुदाय ने, जो कि काली पोशाक पहनने के कारण आकाशस्थि…
- Verse 26वहाँ पर सफेद पोशाक पहने हुए पारसियो के साथ युद्ध करनेवाले शको के हथियार मन्दर पर्वत के आल…
- Verses 27–29भूमिस्थित लोगों ने शस्त्रसमुदाय को मेघो की नाई आकाशमण्डल में उड़ा देखा, आकाश में स्थित लो…
- Verse 30केकयदेशवासियों ने अपने शत्रुओं को वीरपान में (=) रोदन करनेवाले बना दिया, क्योंकि अपने सगे…
- Verse 31माया से पक्षी बने हुए अदृश्य समुद्री मनुष्यों ने फैलाये हुए अपने परों से तद्देहकवासी लोगो…
- Verses 32–34युद्ध से उन्मत्त, खूब कँपाये गये और शस्त्रास्त्र तथा रण की पोशाक का त्याग किये हुए नर्मदा…
- Verse 35धरा पर यानी युद्धभूमि पर आक्रमण करनेवाली धीरप्रकृति अहीनदेश की सेना ने अपने सोल्लास गमन स…
- Verse 36मदोन्मत्त की नाई चलनेवाले पंचनददेश के वीरों ने तद्देहकवासी योद्धाओं को, जो भालों, हाथी के…
- Verses 37–38नीपदेशवासियों द्वारा चक्रों से काटे गये अतएव घोड़ों के साथ पृथिवी में गिरे हुए ब्रह्मावत्…
- Verse 39काष्ठदेशीय योद्धारूपी पंक में (कीचड़ में) बन्धनस्तम्भ के बिना ही फँसे हुए अतएव जर्जर हुए…
- Verses 40–41त्रिगर्तदेश के योद्धाओं से पकड़े गये मित्रगर्तदेशीय योद्धा तिनके की नाई ऊपर को घूमकर नीचे…
- Verses 42–47समरभूमि में चेदिदेशीय वीरों ने जैसे मार्ग में गिरे हुए फूलों की सुकुमारता को धूप हर लेती…
- Verse 48उसमें से अर्द्धचक्राकार बाणों के समूह आदि प्रबल हथियाररूप वायु से जिनके शरीर कम्पित हो गय…
- Verse 49शाल का वन और तालका वन युद्ध में परस्पर दो जनसमूहों के सम्मेलन से महावनरूप में परिणत युद्ध…
- Verse 50उन्मत्त यौवनवाली नन्दनवन की सुन्दरियाँ सुमेरु पर्वत के वन और उपवनों में धीर वीर पुरुषों स…
- Verses 51–52कण्दिश के योद्धाओं को मार कर निकल गये
- Verses 53–54जिसने तालाबों को भरनेवाले झरनों को सुखा दिया ऐसे ग्रीष्म, ऋतु के प्रभाव से जैसे कमल अपनी…
- Verse 55अपने स्थान में ही बैठकर युद्ध करनेवाले धीर वीर प्रस्थवासदेश के वीरो से आवृत (घेरे गये) कौ…
- Verse 56द्विपिदेश के योद्धा, जिन्होंने कमल तोड़े हैं उन पुरुषों की नाई, अपने भालों से बाहुधानदेश…
- Verses 57–58सरस्वती नदी के तीरवर्ती देशों के योद्धा शामतक लगातार परस्पर युद्ध करते हुए शास्त्रार्थ मे…
- Verse 59श्रीवसिष्ठजी प्रस्तुत संग्राम वर्णन का उपसंहार करते हुए कहते हैं : हे श्रीरामचन्द्रजी, मै…