Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 37, Verse 39
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 37, verse 39 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 37 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
काष्ठयोधे निरालानं मग्ना जीर्णा मतङ्गजाः ।
लयमाजग्मुरायुद्धमिद्धेग्नाविन्धनं यथा ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
काष्ठदेशीय योद्धारूपी पंक में (कीचड़ में)
बन्धनस्तम्भ के बिना ही फँसे हुए अतएव जर्जर हुए मतंगजदेशीय सैनिकरूपी मतंगज (हाथी)
युद्धभूमि के चारों ओर ऐसे विनाशको प्राप्त हुए जैसे कि अग्नि में डाले हुए काष्ठ भस्म होते
हैं