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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 37, Verse 25

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 37, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 37 · श्लोक 25

संस्कृत श्लोक

आकाशगार्णवप्रख्यो वहच्छककदम्बकः । अकरोत्पारसीकानां घननैशतमोभ्रमम् ॥ २५ ॥

हिन्दी अर्थ

पर्वतो से नदी की नाई उतरते हुए शकों के समुदाय ने, जो कि काली पोशाक पहनने के कारण आकाशस्थित सागर के तुल्य था, पारसियो को रात्रि के निविड अन्धकार का भ्रम कर दिया