Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 37, Verse 55
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 37, verse 55 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 37 · श्लोक 55
संस्कृत श्लोक
कौन्तक्षेत्राः प्रस्थवासैः स्थित्वा योधिभिरावृताः ।
गुणा इव खलाक्रान्ता गता व्यक्तमशक्तताम् ॥ ५५ ॥
हिन्दी अर्थ
अपने स्थान में ही बैठकर युद्ध करनेवाले
धीर वीर प्रस्थवासदेश के वीरो से आवृत (घेरे गये) कौन्तक्षेत्र के योद्धा दुष्ट पुरुषों से आक्रान्त
सद्गुणो की नाई अत्यन्त अशक्तता को प्राप्त हुए