Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 37, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 37, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 37 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
अवन्तीस्यन्दनश्रेणीकुन्तिपाञ्चनदेरितैः ।
स्पन्दमाना विद्रवन्ती निपपात महाभृगौ ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
जो पहले ये ओर दूसरे रण में भस्म हो गये, ऐसा कहा था, उसी को देशों के नामों का
विभाग कर सर्गा की समाप्ति पर्यन्त कहते है ।
उज्जयिनी की रथपंक्ति कुन्तिदिशवासी ओर पंचनददेशवासियो द्वारा छोड़े गये शस्त्रो से
भयपूर्वक काँपती और दौड़ती हुई बड़े भारी पर्वतप्रपातों में गिर पड़ी