Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 37, Verse 59
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 37, verse 59 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 37 · श्लोक 59
संस्कृत श्लोक
कियदाख्यायत एतज्जिह्वानिचयैः किलालमाकुलितः ।
वासुकिरपि वर्णयितुं न समर्थो रणवरं राम ॥ ५९ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी प्रस्तुत संग्राम
वर्णन का उपसंहार करते हुए कहते हैं : हे श्रीरामचन्द्रजी, मैं कितना कहूँ, यह श्रेष्ठ इतना
विस्तृत है कि वासुकि (शेषनाग) भी आकुलतापूर्वक (शीघ्रता से) अपनी दो हजार जिह्लाओं
से इसका पूर्ण वर्णन करने के लिए समर्थ नहीं हे