Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 37, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 37, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 37 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
सिषिचुः शस्त्रकर्णौघाद्विन्दुभ्यो निगडा गुहान् ।
शरधारावनानीव वीरहेतिप्रभाम्बुदाः ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे वीरों के आयुधों के सदुश कान्तिवाले मेघ अपनी बूँदों
से जंगलों को सींचते हैं, वैसे ही जिन्होंने कानों की भाँति अस्त्र-शस्त्रों को खड़ा किया था,
ऐसे सैनिकों के संघ से निकली हुई वीरायुधप्रभारूपी बिजलीसे मेघवत् प्रतीत हो रहे
निगुड़देशियों ने गुहदेशीय योद्धाओं के प्रति बाणों की धाराएँ बरसाई