Utpatti Prakarana (Creation) · Sarga 9
आठवाँ सर्ग समाप्त नौवाँ सर्ग जीवन्मुक्ति के लक्षण तथा सर्वात्मिताका वर्णन ओर जगत् का प्रलय होने पर अवशिष्ट आत्मस्वरूपका प्रतिपादन |
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- Verses 1–2आत्मविचार भी जब तक आत्मज्ञान न हो जाय, तब तक निरन्तर एकाग्र मन से करना चाहिए । कदाचित् म…
- Verse 3श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : ब्रह्मन्, विदेहमुक्त ओर जीवन्मुक्त का लक्षण आप मुझसे किये । जिस…
- Verses 4–13पहले जीवन्मुक्ति होती है, तदुपरान्त विदेहमुक्त होती है, परन्तु श्लोक में श्रीरामचन्द्रजी…
- Verse 14अब पहले पूछे गये जीवन्मुक्तका लक्षण कहने के लिए भूमिका बोधिते हैँ । हे राम, जैसे वायु अपन…
- Verse 15सर्वप्रथम जीवन्मुक्तता का विद्वानों द्वारा अनुभूत स्वरूपलक्षण कहते हैं । जिस पुरुष को विद…
- Verses 16–23लोकदृष्टि से उसका सर्वात्मरूप तटस्थलक्षण कहते हैं। वही सूर्य बनकर जगत् को प्रकाश और धूप…
- Verse 24पुरुष को समदृष्टि प्राप्त करने में अनेकानेक विध्नबाधाएँ उपस्थित होती है, अतः समदृष्टि दुर…
- Verses 25–26यों उत्कण्ठित हुए श्रीरामचन्द्रजी को मुक्तिप्राप्ति के उपाय के उपदेश द्वारा धीरज देते हुए…
- Verse 27ब्रह्मप्राप्ति होने के अनन्तर ब्रह्मभाव से संसारप्राप्ति ही क्यो नहीं होगी ? क्योकि ब्रह्…
- Verses 28–30दृश्यमान जगत्की पूर्वोक्त अत्यन्त अनुत्पत्तिका ही अवलम्बन कर श्रीवस्तिष्ठजी श्रीरामचन्द्…
- Verses 31–34यदि ज्ञानद्रष्टि से पर्यालोचन किया जाय, तो ब्रह्मे अध्यस्त जगत् की असत्ता स्पष्टतया प्रत…
- Verses 35–38श्री गुरुजी ने जो दृष्टान्त दशयि, उन पर भलीभाँति विचार कर श्रीरामचन्द्रजीको गुरुजी द्वारा…
- Verses 39–44श्रुत अर्थ की एक बार संभावना होने पर पुनः पुनः चिरकाल तक उसका अभ्यास ही उसके अवधारण का उप…
- Verses 45–53उक्त अर्थ का ही प्रलयाख्यायिका द्वारा समर्थन करने के लिए प्रकरणान्तर का आरम्भ करते हैं। व…
- Verses 54–55इसी प्रकर जीवन्मुक्तदशा मे बाधित जगत् का आभासरूप दर्शन भी वही है, ऐसा कहते हैं । जैसे यो…
- Verses 56–75हुआ त्वद्रूप ही एक है, मुझसे साक्षात्कृतस्वरूप होता हुआ मद्रूप ही एक है और अन्य जनों द्वा…
- Verse 76इस प्रकार तत् और त्वं पदार्थ का निर्देश कर अन्त में वाक्यार्थका निर्देश करते हैं। हे श्र…