Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 9, Verse 76
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 9, verse 76 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 9 · श्लोक 76
संस्कृत श्लोक
अजमजरमनाद्यं शाश्वतं ब्रह्म नित्यं शिवममलममोघं वन्यमुच्चैरनिन्द्यम् ।
सकलकलनशून्यं कारणं कारणानामनुभवनमवेद्यं वेदनं विश्वमन्तः ॥ ७६ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार तत् और त्वं पदार्थ का निर्देश कर अन्त में वाक्यार्थका निर्देश करते हैं।
हे श्रीरामजी, जन्म और जरा से रहित, अनादि, नित्य, मंगलमय, निर्मल, अमोघ, सबके
वन्दनीय, अनिन्द्य, सम्पूर्ण सम्बन्धो से रहित, सम्पूर्ण कारणों के कारण, अनुभवरूपी
विश्वात्मक साक्षीरूप जो ब्रह्म है, वही तुम हो (५६)