Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 9, Verse 27
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 9, verse 27 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 9 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
विदेहमुक्तास्त्रैलोक्यं संपद्यन्ते यदा तदा ।
मन्येते सर्गतामेव गता वेद्यविदांवर ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
ब्रह्मप्राप्ति होने के अनन्तर ब्रह्मभाव से संसारप्राप्ति ही क्यो नहीं होगी ? क्योकि ब्रह्म
सवत्मिरूप है, यों भगवती श्रुति कहती है, ऐसी श्रीरामचन्द्रजी शंका करते हैं।
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : हे ज्ञानियों में श्रेष्ठ, विदेहमुक्त पुरुष जब त्रैलोक्यरूपता को
प्राप्त होते हैं, तब वे संसारभाव को ही प्राप्त हुए, ऐसा में समझता हूँ