Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 9, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 9, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 9 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
जीवन्मुक्तपदं त्यक्त्वा देहे कालवशीकृते ।
विशत्यदेहमुक्तत्वं पवनोऽस्पन्दतामिव ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
अब पहले पूछे गये जीवन्मुक्तका लक्षण कहने के लिए भूमिका बोधिते हैँ ।
हे राम, जैसे वायु अपनी सहज चंचलता का परित्याग करने के उपरान्त स्थिरता को प्राप्त
होता है, वैसे ही पूर्वोक्त जीवन्मुक्त पुरुष देह छूटने के अनन्तर यानी प्रारब्ध कर्मो के क्षीण
होने पर जीवन्मुक्तिपदका त्याग कर विदेहमुक्ति में प्रवेश करता है