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Utpatti Prakarana (Creation) · Sarga 20

उन्नीसर्वँ सर्ग समाप्त बीसवाँ सर्ग॑ प्राक्तन जन्म के चरितां के सुनने के उपरान्त भी ऐसा होना सम्भव नहीं है, यों सन्देह में पड़ी हुई लीला को दृष्टान्त और युक्तियों से देवी का प्रतिबोधन ।

25 verse-groups

  1. Verse 1श्रीदेवीजी ने कहा : हे सुन्दरी, वही ब्राह्मण आज राजा होकर तुम्हारा पति बना है और जो अरुन्…
  2. Verse 2नूतन चकवा ओर चकवी की नाई ओर पृथिवी में उत्पन्न हुए शिव और पार्वती की नाई सुन्दर दम्पती वे…
  3. Verse 3पूर्वोक्त कथा का उपसंहार कर रही देवीजी समाधि दुष्ट सृष्टि ओर इस सृष्टि के समान पहले की और…
  4. Verse 4उत्तरोत्तर भ्रम में पूर्व-पूर्व भ्रम हेतु है, ऐसा दर्शाती है। इस पूर्व भ्रम से चित्ताकाश…
  5. Verse 5यों भ्रमरूप होने के कारण सभी सर्ग समान ही हैं, ऐसा कहते हैं। उस भ्रमरूप पूर्वसृष्टि से कौ…
  6. Verse 6श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स श्रीरामचन्द्रजी, श्रीदेवीजी के उक्त वचन सुनकर रानी लीला के सुन…
  7. Verses 7–12लीला ने कहा : आपका वचन तो सत्य है, वह इस प्रकार विरुद्ध कैसे हुआ ? कहाँ ब्राह्मण का जीव अ…
  8. Verse 13श्रीदेवी ने कहा : सुन्दरी, मैं मिथ्या नहीं बोल रही हूँ, तुम इस विषय को भली-भाँति चित्त दे…
  9. Verse 14दूसरों के द्वारा भिद्यमान (उल्लंघन किये जा रहे) जिस (वेदमर्यादा) का मैं संस्थापन करती हूँ…
  10. Verse 15राजा बनने की वासना से उपहित चिदात्मारूप उक्त गाँव के ब्राह्मण का वह जीवात्मा उसी अपने निव…
  11. Verses 16–17यदि वे ही हम दोनों हैं, तो हम लोगों को उक्त वृत्तान्त का स्मरण क्यों नहीं होता और मरण का…
  12. Verses 18–19जैसे स्वप्न में त्रिभुवन है, जैसे संकल्प में तीनों जगत्‌ हैं, जैसे कथा का अर्थरूप संगम है…
  13. Verses 20–21पूर्व सर्ग के असत्य होने पर भी इस सर्ग में क्या आया ? इस पर कर्ती है । भद्रे, असत्यरूप का…
  14. Verse 22सम्पूर्ण प्रपंच के मिथ्या और केवल चिन्मात्र के परिशेष में अनुभव से सिद्ध दृष्टान्त के द्व…
  15. Verse 23इस सृष्टि से केवल गृहाकाश ही नहीं मरता यह बात नहीं है, किन्तु उसके एक देश में स्थित जीवाक…
  16. Verse 24जैसे निर्मल आकाश में कुण्डल के आकार के केशों का भ्रम होता है वैसे ही उक्त पृथिवी के किसी…
  17. Verse 25जैसे गर्भा से खच्चरी के पेट का विनाश हो जाता है वैसे अनेक सर्गो में उत्पन्न होने से ब्राह…
  18. Verse 26आकाश आदि जगत्‌ की सृष्टि में पूर्वकालिक (आकाश आदि जगत्‌ की सृष्टि के पूर्वकी) निरवकाशता क…
  19. Verse 27लीला ने कहा : हे देवी, आज से आठ दिन पहले उस ब्राह्मण की मृत्यु हुई थी और हमें उत्पन्न हुए…
  20. Verse 28श्रीदेवी ने कहा : सुन्दरी, जैसे देशदैर्ध्य नहीं है, वैसे ही कालदैर्ध्य भी है ही नहीं, इस…
  21. Verses 29–35जैसे यह जगत्‌-सृष्टि की प्रतीति कल्पनामात्र है, वैसे ही यह क्षण, कल्प आदि की प्रतीति भी क…
  22. Verses 36–48मरने के अनन्तर तुरन्त ही अपना शरीर युवावस्था में दिखने पर भी जैसे पुष्प के बाद फल का उदय…
  23. Verses 49–52यह मेरी माता है, यह पिता है, मैं बालक हुआ इत्यादि अनुभूत या अननुभूत जो स्मृतिमय क्रम है,…
  24. Verse 53अविद्या से केवल असरत्‌-प्रतीति ही नहीं होती, किन्तु सत्‌ से विपरीत भान होना भी प्रसिद्ध ह…
  25. Verse 54जैसे मिर्चे के बीज के किनके में विद्यमान तीक्ष्णता डण्ठलों में अपने स्वरूप को व्यक्त किये…