Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 20, Verse 22
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 20, verse 22 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 20 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
स्वप्नसंभ्रमसंकल्पस्वानुभूतिपरम्पराः ।
प्रमाणान्यत्र मुख्यानि संबोधाय प्रदीपवत् ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
सम्पूर्ण प्रपंच के मिथ्या और केवल चिन्मात्र के परिशेष में अनुभव से सिद्ध दृष्टान्त के
द्वारा अनुमान प्रमाण कहते हैं ।
स्वप्न, भ्रम और मनोरथ के अपने-अपने अनुभव, दीपक के समान, यहाँ पर बोध करने
के लिए मुख्य प्रमाण हैं