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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 20, Verse 26

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 20, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 20 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

परमाणौ परमाणौ सन्ति वत्से चिदात्मनि । अन्तरन्तर्जगन्तीति किंत्वेतन्नाम शङ्क्यते ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

आकाश आदि जगत्‌ की सृष्टि में पूर्वकालिक (आकाश आदि जगत्‌ की सृष्टि के पूर्वकी) निरवकाशता की विरोधिनी नहीं है, परमाणु से अवच्छिन्न (अतिसूक्ष्म) चिदात्मा में भी जगतो का सम्भव होने से असंभव की शंका निरवकाश ही है, ऐसा कहती हे । भद्रे, परमाणु रूप चिदात्मा में भीतर-भीतर अनेक जगत्‌ विद्यमान हैं, फिर उक्त चिदात्मा में ब्राह्मण के घर की असंभावना तुम क्यों करती हो ?