Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 20, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 20, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 20 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
इत्याकर्ण्य चिरं चारु विस्मयोत्फुल्ललोचना ।
भूत्वोवाच वचो लीला लीलालसपदाक्षरम् ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स श्रीरामचन्द्रजी,
श्रीदेवीजी के उक्त वचन सुनकर रानी लीला के सुन्दर विशाल नयन आश्चर्य से विकसित हो
गये, वह विलासपूर्वक मन्द-मन्द बोली