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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 20, Verse 28

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 20, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 20 · श्लोक 28

संस्कृत श्लोक

श्रीदेव्युवाच । देशदैर्घ्यं यथा नास्ति कालदैर्घ्यं तथाङ्गने । नास्त्येवेति यथान्यायं कथ्यमानं मया शृणु ॥ २८ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीदेवी ने कहा : सुन्दरी, जैसे देशदैर्ध्य नहीं है, वैसे ही कालदैर्ध्य भी है ही नहीं, इस विषय को युक्तिपूर्वक तुमसे कहती हूँ, तुम सावधान होकर सुनो