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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 20, Verse 23

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 20, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 20 · श्लोक 23

संस्कृत श्लोक

स्थितो ब्राह्मणगेहान्तर्द्विजजीवस्तदम्बरे । ससमुद्रवना पृथ्वी स्थिताब्ज इव षट्पदः ॥ २३ ॥

हिन्दी अर्थ

इस सृष्टि से केवल गृहाकाश ही नहीं मरता यह बात नहीं है, किन्तु उसके एक देश में स्थित जीवाकाश का एक देश भी नहीं मरता है, इसलिए यह मिथ्या है, ऐसा कहते हैं। ब्राह्मण के घर के अन्दर ब्राह्मण का जीव है, उस जीवाकाश में, कमल में भ्रमर की नाई, समुद्र नद-नदी और वनों से परिपूर्ण यह पृथिवी है