Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 20, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 20, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 20 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
तस्याः कस्मिंश्चिदेकस्मिन्पेलवे कोणकोटरे ।
इदं पत्तनदेहादि केशोण्ड्रक इवाम्बरे ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे निर्मल आकाश में कुण्डल के
आकार के केशों का भ्रम होता है वैसे ही उक्त पृथिवी के किसी एक निर्मल कोने में नगर, देह
आदि की प्रतीति होती हे