Utpatti Prakarana (Creation) · Sarga 10
नैौर्वौँ सर्ग समाप्त दसवाँ सर्ग पूर्वोक्त ब्रह्मलक्षण मेँ विरोध की -सी संभावना कर उसके परिहार द्वारा उक्त ब्रह्म-लक्षण के तात्पर्य का वर्णन ।
26 verse-groups
- Verses 1–4महाप्रलय में जो सद्रूप कुछ अवशिष्ट रहता है, “वह न तेज है ओर न तम है“ इत्यादि विरुद्ध स्वर…
- Verses 5–9श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स श्रीरामचन्द्रजी, आपने भ् "कारणं कारणानाम्“ इससे तत्पद के वाच…
- Verse 10यदि कोड शंका करे कि उस समय यदि जगत् का अस्तित्व है, तो वह प्रलयकाल नहीं कहा जा सकता । यद…
- Verse 11यदि कोई कहे कि खम्भ में प्रतिमा के समान प्रलयकाल में जगत् है, तो उसके विषय में वादियों क…
- Verse 12यदि कोई कहे कि उक्त प्रकार से दोनों में यदि समानता नहीं है, तो स्तम्भप्रतिमा का दृष्टान्त…
- Verse 13पूर्वोक्त रीति से ब्रह्म मेँ जगत् की सत्ता भले ही हो, किन्तु जगत् की उत्पत्ति और विनाश…
- Verse 14यदि कोड कहे कि यदि शून्य नहीं है, तो नोदेति”, “न शाम्यति” इस प्रकार शून्यार्थक नञ् से उस…
- Verse 15इस प्रकार “न शून्यं कथमेतत्स्यात्“ इत्यादि से उक्त प्रथम प्रश्न का समाधान कर अव न प्रकाश…
- Verse 16इसीलिए “न प्रकाशः” कहा हे । इससे वह कैसे भास्वर नहीं है 2“ इस प्रश्न का भी समाधान हो गया…
- Verse 17स्वप्रकाश ब्रह्म मे तम की स्थिति कदापि नहीं हो सकती | इसलिए “न तमः“ कथन उचित ही है । यहाँ…
- Verse 18अन्यथा अनवस्थादोष प्राप्त होगा, यह अर्थ है । दूसरे और तीसरे प्रश्न के उत्तर का जो उपपादन…
- Verses 19–20जैसे बिल्व (बेल) फल और बिल्व-फल के उदर में कुछ भी अन्तर नहीं है, वैसे ही ब्रह्म ओर जगत्…
- Verse 21यदि कोई शंका करे कि जल के अन्दर स्थित पृथिवी अपने आधार जलरूप नहीं देखी जाती ओर घडे आदि के…
- Verses 22–26उक्त अर्थ को ही स्पष्ट करते हैं। इसलिए आकाश से भी निर्मल चिदाकाश ब्रह्म जैसा निराकार है,…
- Verse 27आकाररहित ब्रह्मरूप से साकार जगत् की सत्ता कैसे है, ऐसी आशंका कर जैसे विभिन्न आकारवाली लह…
- Verse 28इस प्रकार उपाधिभूत जगत् का कारण से अपृथक्त्व कहते है । जो पूर्ण ब्रह्म से ओपाधिक भेद द्व…
- Verses 29–31शंका : यदि वह पूर्ण है, तो जीवरूप से क्यो प्रतीत होता है ? समाधान : जो वह विश्वरूप से प्र…
- Verses 32–33जीव अणुपरिमाण या मध्यमपरिमाण है, पुण्य- पाप आदि से दूषित होने के कारण अशुचि है ओर कमनुसार…
- Verse 34जो अपने में विषयप्रकाशनरूप चिट्रूपता को भी सहन नहीं कर सकता, वह अनुकूल और प्रतिकूल विषयभो…
- Verse 35चिद्रूप का उदय न होने से ही उसमें जीवता है ही नहीं और इसी कारण बुद्धिता, चित्तता, इन्द्रि…
- Verse 36सम्पूर्ण प्रश्नो का समाधान करने पर फलित अर्थका उपसंहार करते हैं । इस प्रकार महाभूत-भौतिक…
- Verses 37–42इस प्रकार प्रश्नो का समाधान होने पर शंकाशून्य चित्त मे जिस रूप से उसका अपरोक्ष ज्ञान हो स…
- Verses 43–49अब उक्त रूप योगाभ्यास से रहित पुरुषों के भी अनुभवमे जैसे आरूढ हो, वैसा उसका प्रतिपादन करत…
- Verse 50वेद्य (ज्ञेय) आदि त्रिपुटी के जन्म आदिका हेतु जो सच्चिदानन्दात्मक रूप हे, वही वह है, - ऐस…
- Verses 51–53उसमें जो निमित्तकारणता है, वह परिणामरूप से नहीं है, किन्तु विवर्तरूप से है, ऐसा कहते हैं।…
- Verse 54प्रलयावस्था में ब्रह्मा, सूर्य, विष्णु, हर, इन्द्र, सदाशिव आदि के विलीन होने पर सम्पूर्ण…