Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 10, Verses 19–20

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 10, verses 19–20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 19,20

संस्कृत श्लोक

बिल्वस्य बिल्वमध्यस्य यथा भेदो न कश्चन । तथास्ति ब्रह्मजगतोर्न मनागपि भिन्नता ॥ १९ ॥ सलिलान्तर्यथा वीचिर्मृदन्तर्घटको यथा । तथा यत्र जगत्सत्ता तत्कथं खात्मकं भवेत् ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे बिल्व (बेल) फल और बिल्व-फल के उदर में कुछ भी अन्तर नहीं है, वैसे ही ब्रह्म ओर जगत्‌ में तनिक भी भिन्नता नहीं है । जैसे जल के अन्दर तरंग और मिट्टी के अन्दर घडा है, वैसे ही जिस ब्रह्म मे जगत्‌ की सत्ता है, वह शून्य कैसे हो सकता है