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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 10, Verse 18

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 10, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 18

संस्कृत श्लोक

मुक्तं तमःप्रकाशाभ्यामित्येतदजरं पदम् । आकाशकोशमेवेदं विद्धि कोशं जगत्स्थितेः ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

अन्यथा अनवस्थादोष प्राप्त होगा, यह अर्थ है । दूसरे और तीसरे प्रश्न के उत्तर का जो उपपादन किया गया, उसीका उपसंहार करते हैं। हे श्रीरामचन्द्रजी, जरा और मरण से वर्जित यह परम पद तम और प्रकाश से शून्य है, यह बात उक्त प्रकार से जाननी चाहिए । धनरूपी जगत्‌सत्ता के कोशगृह (धनागार) रूपी ब्रह्म को आप आकाश के मध्य के समान ही स्वच्छ जानिए