Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 10, Verse 12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 10, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
तत्स्तम्भपुत्रिकाद्येतत्परमार्थे जगत्स्थितेः ।
एकदेशेन सदृशमुपमानं न सर्वथा ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि कोई कहे कि उक्त प्रकार से दोनों में यदि समानता नहीं है, तो स्तम्भप्रतिमा का
दृष्टान्त कैसे दिया ? इस पर कहते हैँ ।
पूर्वोक्ति स्तम्भप्रतिमा आदि ब्रह्म मेँ जगत् की सत्ता है” इस एक अंश से (उसकी सत्ता के
अस्तित्वरूप अंश से) दृश्य हैं, अत: उसी अंश में उपमान हैं, सर्वथा दृष्टान्त नहीं । भाव यह
कि जैसे खम्भे में प्रतिमा की सत्ता है, वैसे ही ब्रह्म में जगत् की सत्ता है, केवल इसी अंश में
स्तम्भप्रतिमा का दृष्टान्त है, अन्य अंशों में नहीं