Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 10, Verse 54
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 10, verse 54 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 54
संस्कृत श्लोक
ब्रह्मार्कविष्णुहरशक्रसदाशिवादि शान्तौ शिवं परममेतदिहैकमास्ते ।
सर्वोपधिव्ययवशादविकल्परूपं चैतन्यमात्रमयमुज्झितविश्वसङ्गम् ॥ ५४ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रलयावस्था में ब्रह्मा, सूर्य, विष्णु, हर,
इन्द्र, सदाशिव आदि के विलीन होने पर सम्पूर्ण उपाधियों का विलय होने से विश्व के संसर्ग
से रहित निर्विकल्परूप, चैतन्यमात्र, परमशिव केवल वही एक शेष रहता है