Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 10, Verse 35
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 10, verse 35 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
चिद्रूपानुदयादेव तत्र नास्त्येव जीवता ।
न बुद्धिता चित्तता वा नेन्द्रियत्वं न वासना ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
चिद्रूप का उदय न होने से ही उसमें जीवता है ही नहीं और इसी
कारण बुद्धिता, चित्तता, इन्द्रियता और वासना भी नहीं है। इससे ““कर्थ॑ न बुद्धितत्त्वं स्यात्कथं
वान मनो भवेत् इन शंकाओं का भी निरास हुआ