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Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1) · Sarga 36

पैंतीसवाँ सर्ग समाप्त छत्तीसवाँ सर्ग समस्त विश्व की उत्पत्ति के निमित्त, सर्वाकार से स्थित तथा किसी से स्पर्श न होने के कारण विशुद्ध उस चितितत्त्व के सर्वैश्वर्य का वर्णन ।

18 verse-groups

  1. Verse 1ईश्वर ने कहा : हे मुने, चूंकि इस चितिरूप आत्मतत्त्व का साक्षात्कार कर पुरुष फिर संसार में…
  2. Verse 2हे मुने, तुम इसी निर्मल चितितत््व को अखिल बीजों का भी बीज, संसाररूप सृष्टि का परम सार और…
  3. Verse 3वह चितितत्त्व निखिल कारणों की क्रियाशक्तियों का कारण है और अपनी सत्ता से समस्त भावों मे स…
  4. Verse 4सम्बन्ध से जनित अभिव्यक्ति से विषयों का प्रकाश करनेवाला प्रत्यक्‌ रूप चेतन है, चेत्यो का…
  5. Verse 5हे मुने उसी को मुनिलोग चक्षु आदि एवं सूर्य आदि प्रकाशो का प्रकाशक, स्वयं चक्षु, सूर्य आदि…
  6. Verse 6उस चितितत्त्व में पृथिवी, अप्‌, तेजरूप सत्‌ ओर वायु एवं आकाशरूप त्यत्‌ नहीं रहते। वह सद्र…
  7. Verse 7महर्षे, वही चितितत्त्व स्वयं ही रंजन बीजावस्था में रागात्मक, विषयस्मृतिकाल में चित्त-क्षो…
  8. Verse 8भद्र, इस चितिरूपी विशाल चित्त मेँ पहले कोटि-कोटि जगद्रूषी मरुभूमियों की मरीचिकाएँ प्रस्फु…
  9. Verse 9इस स्वप्रकाशस्वरूप आत्मतत्त्व में अपनी एकमात्र सत्ता से जगत्‌नामधारी विलक्षणता यद्यपि प्र…
  10. Verse 10इसी कारण (अणोरणीयान्महतो महीयान्‌” (आत्मतत्त्व सूक्ष्मातिसूक्ष्म परमाणु से भी सूक्ष्मतम औ…
  11. Verse 11इस चितितत्त्व मे कालकृत दीर्घता और सूक्ष्मता का भेद नहीं है, इस आशय से कहते हैं। उस चितित…
  12. Verse 12उक्त अर्थ को ही विशवरूप से कहते हैं। हे मुने, यद्यपि यह चितितत्त्व केश के अग्रभाग से भी स…
  13. Verse 13कुछ न करते हुए ही उसने इस महान्‌ संसार-रचना के प्रति कर्तृता प्राप्त की है और यह बड़ा कर्…
  14. Verse 14यह द्रव्यस्वरूप होता हुआ भी द्रव्यरहित, द्रव्यरहित होता हुआ भी द्रव्ययुक्त, शरीरवर्जित हो…
  15. Verse 15यह साठ घड़ी का अद्यस्वरूप होता हुआ भी निरन्तर प्रातःकालरूप (प्रारम्भ के त्रिमुहूर्तात्मक…
  16. Verses 16–17उसी प्रकार उन्मत्त, अज्ञानी आदि द्वारा भाषित निरर्थक अपशब्दस्वरूप भी वही है, ऐसा बतलाने क…
  17. Verse 18इस वितितत्व का पहले साक्षात्कार कर प्रह्लाद ने उसे प्रणाम किया था, इसका स्मरण कराते हुए उ…
  18. Verse 19की जो लक्ष्मीलता है, उसे लीलावश आकाश में चंचल मेघों की गर्जना की नाई गर्जन करनेवाली "तत्त…