Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 36, Verse 3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 36, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 36 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
कारणं कारणौघानामकारणमनाविलम् ।
भावनं भावनौघानामभाव्यमभवात्मकम् ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
वह चितितत्त्व निखिल कारणों की क्रियाशक्तियों का कारण है
और अपनी सत्ता से समस्त भावों मे सत्ता प्रदान करनेवाला है । वास्तव में वह न किसी का कारण है
और न किसी का कार्य है, क्योकि वह विशुद्ध ओर अजन्मा है