Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 36, Verse 5
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 36, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 36 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
आलोकालोकममलमनालोक्यमलोकजम् ।
आलोकं बीजबीजौघं चिद्धनं विमलं विदुः ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मुने उसी
को मुनिलोग चक्षु आदि एवं सूर्य आदि प्रकाशो का प्रकाशक, स्वयं चक्षु, सूर्य आदि प्रकाशो से प्रकाशित न
होनेवाला, अलौकिक, स्वयं अकेला ही समस्त बीजों के बीजरूप से स्थित, प्रकाश और निर्मल चिद्घन
कहते हैं