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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 36, Verse 19

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 36, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 36 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

यत्रान्तरालगहनेन विलासवत्या हेलाविलोलघनसर्जितयामलेन । मल्लेन पल्लवदलामलमालितानां लक्ष्मीलताऽविरलिता वलितेव मुष्टिः ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

की जो लक्ष्मीलता है, उसे लीलावश आकाश में चंचल मेघों की गर्जना की नाई गर्जन करनेवाली "तत्त्वमसि" इस महाकाव्य श्रुति से विलास कर रही ब्रह्मविद्यारूपी हथिनी ने मल्ल के द्वारा प्रतिमल्ल को मारने के लिए बँधी हुई मुड़ी की नाई चिदेकरस स्वरूप कर दिया है (इसी तरह इस श्लोक के और भी अनेक अर्थ किये जा सकते हैं, जिन्हे विद्वान अपनी कल्पना से कर ले ।)